वर्तमान युग में विज्ञान और तकनीकी का असीमित विकास हुआ है और हो रहा है। शिक्षा एक जीवंत संस्कार प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक/आचार्य की भूमिका महत्वपूर्ण है। उसका स्थान यंत्र नहीं ले सकता। फिर भी शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में आधुनिक विज्ञान-तकनीकी का उपयोग करने की दिशा में विद्या भारती प्रयत्नशील है। दृश्य-श्रव्य शिक्षण सामग्री के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। श्रव्य-ध्वनि मुद्रिकाएँ तैयार कराई गई हैं। जिनका अनेक विषयों के शिक्षण में उपयोग होता है। एक कैसेट्स एवं फिल्म लाइब्रेरी भी कुरुक्षेत्र में स्थापित की गयी है। इस शिक्षण तकनीकी विभाग के विकास की अनेक योजनायें विचाराधीन हैं।





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